उत्तराखंड में आने वाले वर्षों में बिजली की खपत तेजी से बढ़ने वाली है। मैकेंजी ग्लोबल की एक नई अध्ययन रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में 2032 तक बिजली की मांग वर्तमान स्तर से दोगुनी हो सकती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि बढ़ती आबादी, औद्योगिक विकास और पर्यटन के विस्तार के चलते प्रदेश की ऊर्जा आवश्यकताएँ अभूतपूर्व गति से बढ़ेंगी।
रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 से 2032 के बीच राज्य में बिजली की सालाना औसत मांग वृद्धि दर 7 से 8 प्रतिशत रहने की संभावना है। इसमें शहरी क्षेत्रों और पर्वतीय जिलों में तेजी से बढ़ रहे घरेलू उपभोक्ताओं का योगदान सबसे अधिक होगा।
ऊर्जा संकट की चुनौती बढ़ेगी
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि उत्पादन क्षमता को समान अनुपात में नहीं बढ़ाया गया, तो आने वाले समय में राज्य को ऊर्जा संकट का सामना करना पड़ सकता है। रिपोर्ट में सौर और जल विद्युत उत्पादन को बढ़ाने पर विशेष बल दिया गया है।
राज्य के ऊर्जा विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सरकार ने इस रिपोर्ट को गंभीरता से लिया है। “हम अगले कुछ वर्षों में हाइड्रो और सोलर प्रोजेक्ट्स के ज़रिए उत्पादन क्षमता बढ़ाने की दिशा में काम कर रहे हैं,” अधिकारी ने कहा।
पर्यटन और शहरीकरण बने मुख्य कारण
मैकेंजी ग्लोबल के विश्लेषण के अनुसार, चारधाम यात्रा मार्गों के विस्तार, औद्योगिक कॉरिडोरों की स्थापना और नई आवासीय परियोजनाओं के चलते बिजली की मांग में भारी उछाल देखा जाएगा। साथ ही इलेक्ट्रिक वाहनों के प्रसार से भी लोड बढ़ेगा।
ऊर्जा नीति में संशोधन की जरूरत
विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि राज्य सरकार को दीर्घकालिक ऊर्जा नीति तैयार करनी चाहिए, जिसमें हरित ऊर्जा उत्पादन, ट्रांसमिशन नेटवर्क के सुदृढ़ीकरण और ऊर्जा संरक्षण कार्यक्रमों को प्राथमिकता दी जाए।

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