पौड़ी में गुलदार का खूनी हमला, पांच साल की बच्ची की मौत; आक्रोशित ग्रामीणों ने विधायक को बनाया बंधक

खांड्यूसैंण के पास ओजली गांव में घर के आंगन से बच्ची को उठा ले गया गुलदार, ग्रामीणों ने वन विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाकर किया प्रदर्शन।

उत्तराखंड के पौड़ी जिले में वन्यजीवों के हमले की एक बेहद दर्दनाक घटना सामने आई है। पौड़ी मुख्यालय से लगभग छह किलोमीटर दूर खांड्यूसैंण के नजदीक ओजली गांव में गुलदार ने पांच वर्षीय बच्ची आरुषि पर हमला कर उसकी जान ले ली। इस घटना के बाद पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल है। जानकारी के अनुसार बच्ची मंगलवार शाम अपने घर के आंगन में खेल रही थी। इसी दौरान अचानक गुलदार वहां पहुंचा और बच्ची को उठाकर झाड़ियों की ओर ले गया। घटना को देखकर परिवार के लोगों में चीख-पुकार मच गई। बच्ची के सात वर्षीय भाई ने गुलदार को उसे ले जाते हुए देखा और शोर मचाया। इसके बाद परिजनों और ग्रामीणों ने बच्ची की तलाश शुरू कर दी। काफी खोजबीन के बाद बच्ची का शव घर से लगभग 200 मीटर दूर बरामद किया गया। घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। इस हादसे ने एक बार फिर पहाड़ी गांवों में मानव-वन्यजीव संघर्ष की गंभीर समस्या को सामने ला दिया है।

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में लंबे समय से गुलदार की गतिविधियां देखी जा रही थीं। लोगों ने पहले भी वन विभाग को इसकी जानकारी दी थी, लेकिन उनका आरोप है कि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए। घटना के बाद ग्रामीणों में भारी आक्रोश फैल गया। सूचना मिलने पर पौड़ी के विधायक राजकुमार पोरी भी मौके पर पहुंचे, लेकिन आक्रोशित लोगों ने उन्हें करीब दो घंटे तक घेरकर रखा और विरोध प्रदर्शन किया। ग्रामीणों ने मांग की कि आदमखोर गुलदार को जल्द पकड़ा जाए या नियमानुसार उसे मारने की कार्रवाई की जाए। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि इससे पहले भी क्षेत्र में एक अन्य बच्ची पर गुलदार ने हमला करने की कोशिश की थी। समय रहते बच्ची के घर के अंदर चले जाने के कारण उसकी जान बच गई थी। लगातार हो रही ऐसी घटनाओं के कारण माता-पिता अपने बच्चों को घर के बाहर अकेले भेजने से डर रहे हैं। शाम के समय गांव की गलियों और रास्तों पर आवाजाही भी कम हो गई है। वन विभाग के अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और ग्रामीणों को आवश्यक सुरक्षा उपायों का भरोसा दिया।

इस घटना ने पौड़ी जिले के साथ-साथ पूरे पर्वतीय क्षेत्र में वन्यजीवों से सुरक्षा के सवाल को फिर से महत्वपूर्ण बना दिया है। पहाड़ी गांवों के आसपास जंगलों का विस्तार और आबादी के नजदीक वन्यजीवों की बढ़ती गतिविधियां कई बार लोगों के लिए खतरा बन जाती हैं। विशेष रूप से बच्चों और बुजुर्गों को ऐसे हमलों से अधिक जोखिम रहता है। वन विभाग के लिए जरूरी है कि संवेदनशील गांवों में नियमित गश्त की जाए और गुलदार की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए कैमरा ट्रैप तथा अन्य निगरानी साधनों का उपयोग किया जाए। जिन क्षेत्रों में लगातार हमले हो रहे हैं, वहां पिंजरे लगाने और जरूरत पड़ने पर प्रशिक्षित विशेषज्ञों की सहायता लेने की व्यवस्था होनी चाहिए। ग्रामीणों को भी सलाह दी जानी चाहिए कि छोटे बच्चों को अकेले बाहर न भेजें और अंधेरा होने के बाद जंगल से लगे रास्तों पर सावधानी बरतें। इसी जिले के कोटद्वार क्षेत्र में भी एक आठ वर्षीय बच्ची पर गुलदार के हमले की खबर सामने आई है। उसे चोटें आई हैं और अस्पताल में उपचार कराया गया। वन विभाग के अनुसार बच्ची की स्थिति खतरे से बाहर है। लगातार सामने आ रही घटनाएं बताती हैं कि मानव-वन्यजीव संघर्ष से निपटने के लिए स्थायी और प्रभावी योजना की जरूरत है।